Broaching ( chapter=18)
ब्रोचिंग क्या है ? उत्पादन में इसका क्या महत्त्व है ?
उत्तर-ब्रोचिंग एक मशीनिंग क्रिया है। इसमें अलग-अलग साइज और आकृति के टूल प्रयोग किए जाते हैं, जिसे बोच कहते हैं। इसके द्वारा एक ही कट में धातु की कटिंग की जाती है। ब्रोचिंग द्वारा आंतरिक व बाहरी विभिन्न आकार की सीधी व विषम सतहों को काटा जाता है। ब्रोच टूल एक लम्बा कटिंग टूल है, इसमें कटिंग टीथ (Cutting Teeth) होते हैं। इन्हें मशीन में फिट करके ऊंचाई से पूरी ताकत से उन्हें चलाया जाता है और इनके द्वारा एक ही स्ट्रोक (Stroke) में पूरी कटिंग हो जाती है। इसके द्वारा 6 मि.मी. तक की धातु एक बार में काटी जाती है।
ब्रोचिंग का उत्पादन में विशेष स्थान अर्थात महत्त्व है। यह एक आधुनिक मशीनिंग क्रिया है। इस विधि के लिए ड्रिल किए सुराखों को विभिन्न आकार में बहुत जल्दी और शुद्धता में बनाया जाता है क्योंकि दूसरी मशीनों के द्वारा जिस कार्य को करने के लिए अधिक समय लगता है, उसी काम को बोचिंग विधि द्वारा बहुत कम समय में कर लिया जाता है। दूसरे ब्रोचिंग के द्वारा तैयार पार्ट एक ही साइज में बनते हैं, जिससे विनिमयशीलता का गुण आता है तथा पार्टी को बनाते समय रिजेक्शन (Rejection) कम होती है और उत्पादित पार्ट सस्ता पड़ता है। आजकल बोचिंग का अत्यधिक प्रयोग किया जाता है जहां एक ही साइज में और आकार के कई पार्ट बनाने होते हैं। इसमें दोष केवल इतना है कि इसके एक टूल के द्वारा सब प्रकार की जॉब नहीं बनाई जाती। इसके अतिरिक्त बोच टूल मंहगे होते हैं।
ब्रोचिंग का सिद्धान्त क्या है ?
उत्तर- आमतौर पर पतली चादरों (Sheets) में सुराख करने के लिए सॉलिड पंच या हॉलों पंच का प्रयोग किया जाता है और ब्लैक स्मिसी (Black-Smithy) में डिफ्ट के द्वारा सुराख किए जाते हैं। इसके लिए डिफ्ट क के ऊपर हथौड़े की चोट लगाकर विभिन्न आकार के सुराख बनाये जाते हैं। ठीक इसी प्रकार से ब्रोच टूल को विभिन्न प्रकार की ब्रोचिंग मशीनों और प्रेस (Press) में फिट करके उन्हें हाइड्रोलिक विधि से चला कर पूरे दबाव इन के साथ चलाया जाता है या ब्रोच को खींचा जाता है, जिससे बोच आकृति के अनुसार कट काटता है अर्थात् सतह तैयार करता है। ये मशीनें ऊपर-नीचे कि चलने वाली गति में चलती है और इनके द्वारा एक ही कट में पूरी कटाई की जाती है। इनके द्वारा थोड़े समय में अधिक धातु काटी जाती है। इससे दो उत्पादन में वृद्धि होती है।
प्रश्न 3. ब्रोचिंग के लाभ लिखो।
ब्रोचिंग के हानियां लिखो।
उत्तर- ब्रोचिंग के लाभ (Advantages of Broaching)
1. ब्रोचिंग के द्वारा उन अनियमित सतहों का मशीनीकरण करना सम्भव है, जो ब्रोच की धुरी के समान्तर मशीन करनी हों।
2. इस क्रिया में रफ व फिनिश कट एक ही पास (Pass) में एक ही ब्रोच द्वारा लगाये जाते हैं।
३. यह क्रिया आंतरिक तथा बाहरी सतहों के लिए की जाती है।
4. यह क्रिया तेजी से व एक ही (Pass) में की जाती है।
5. बोचिंग से उत्पादन में वृद्धि होती है, क्योंकि ब्रोच एक ही कट में पूरी कटिंग कर देता है।
हानियां (Disadvantages) बोचिंग की निम्नलिखित हानियां होती हैं -
1. इन मशीनों की कीमत (Cost) बहुत अधिक होती है।
2. ब्रोच टूल महंगे होते हैं।
3. एक प्रकार के ब्रोच से केवल उसी प्रकार की जॉब की जाती है, जबकि दूसरी जॉब के लिए दूसरे ब्रोच की आवश्यकता होती है।
4. इसमें मशीनिंग करते समय ज्यादा दबाव पड़ता है, जिसे कुछ जॉब सहन नहीं कर पाती और टूट जाती है।
5. इसमें बिना फिक्सचर के कार्य नहीं किया जा सकता।
Ov
करो।
6. इसमें दूल को तेज करवाने के लिए ज्यादा खर्च आता है। 7. इस विधि में बड़े आकार की जॉबों की ब्रोचिंग नहीं की जा ड्रिल सकती, क्योंकि बहुत बड़े बोच बनाने मुश्किल होते हैं तथा उसके लिए मशीन भी बड़ी चाहिए।
8. बन्द सुराखों (Blind Holes) की ब्रोचिंग नहीं होती। 9. इसके द्वारा ज्यादा मात्रा में धातु नहीं काटी जा सकती।
10. भारी स्टॉक (Heavy Stock) की ब्रोचिंग नहीं की जा सकती,
प्रश्न 3. ब्रोचिंग के लाभ लिखो।
ब्रोचिंग के हानियां लिखो।
उत्तर- ब्रोचिंग के लाभ (Advantages of Broaching)
1. ब्रोचिंग के द्वारा उन अनियमित सतहों का मशीनीकरण करना सम्भव है, जो ब्रोच की धुरी के समान्तर मशीन करनी हों।
2. इस क्रिया में रफ व फिनिश कट एक ही पास (Pass) में एक ही ब्रोच द्वारा लगाये जाते हैं।
३. यह क्रिया आंतरिक तथा बाहरी सतहों के लिए की जाती है।
4. यह क्रिया तेजी से व एक ही (Pass) में की जाती है।
5. बोचिंग से उत्पादन में वृद्धि होती है, क्योंकि ब्रोच एक ही कट में पूरी कटिंग कर देता है।
हानियां (Disadvantages) बोचिंग की निम्नलिखित हानियां होती हैं -
1. इन मशीनों की कीमत (Cost) बहुत अधिक होती है।
2. ब्रोच टूल महंगे होते हैं।
3. एक प्रकार के ब्रोच से केवल उसी प्रकार की जॉब की जाती है, जबकि दूसरी जॉब के लिए दूसरे ब्रोच की आवश्यकता होती है।
4. इसमें मशीनिंग करते समय ज्यादा दबाव पड़ता है, जिसे कुछ जॉब सहन नहीं कर पाती और टूट जाती है।
5. इसमें बिना फिक्सचर के कार्य नहीं किया जा सकता।
Ov
करो।
6. इसमें दूल को तेज करवाने के लिए ज्यादा खर्च आता है। 7. इस विधि में बड़े आकार की जॉबों की ब्रोचिंग नहीं की जा ड्रिल सकती, क्योंकि बहुत बड़े बोच बनाने मुश्किल होते हैं तथा उसके लिए मशीन भी बड़ी चाहिए।
8. बन्द सुराखों (Blind Holes) की ब्रोचिंग नहीं होती। 9. इसके द्वारा ज्यादा मात्रा में धातु नहीं काटी जा सकती।
10. भारी स्टॉक (Heavy Stock) की ब्रोचिंग नहीं की जा सकती,

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