Lapping (Chapter =17)
लैपिंग किसे कहते हैं ? लैपिंग क्यों की जाती है तथा लैपिंग के लिए क्या औज़ार व सामान चाहिए ?
लैपिंग फिनिशिंग की अन्तिम किया है। यह क्रिया ग्राइण्डिंग के बाद पार्ट को ज्यादा शुद्ध साइज में बनाने और फिनिशिंग करने के लिए की जाती है। यह क्रिया पार्ट की अन्दरूनी व बाहरी दोनों प्रकार की सतह पर की जाती है।
लैपिंग निम्नलिखित कारणों से की जाती है-
1. बहुत ही शुद्ध साइज बनाने के लिए।
2.उच्च कोटि की फिनिशिंग प्राप्त करने के लिए।
3. पार्टी की सही फिटिंग प्राप्त करने के लिए।
4. सतहों को इतना समतल बनाने के लिए ताकि दोनों सतह आपस में जायें जैसे स्लिप गेज।
लैपिंग के लिए निम्नलिखित औजार व सामान की आवश्यकता होती
1.लैपटूल विभिन्न आकृति के
2. लैपिंग कम्पाऊण्ड
3. लैपिंग प्लेट
4. एबेसिव बैल्ट लैपिंग मशीन।
लैपिंग कम्पाऊंड, ऑयल, पैराफिन, ग्रीस
1. ज्योमितिय परिशुद्धता सुधार लाना।
2. लैपिंग द्वारा सरफेस फिनिश को संशोधित करना।
3. कम्पोनेंट की उच्च डिग्री की विमांकन शुद्धता प्राप्त करना।
4. मैचिंग कम्पोनेंट के बीच फिट की गुणवत्ता को सुधारना।
लैपिंग के लाभ लिखो।
लैपिंग के लाभ (Advantages of Lapping)
1. वर्कपीस के साइज उच्च परिशुद्धता में प्राप्त किए जाते है।
2. सतह पर उभरे छोटे-छोटे हाई स्पॉटस बहुत ही पास-पास आ जाते है।
3. लैपिंग से उच्च स्तर की फिटिंग प्राप्त की जाती है।
4. वर्कपीस की सतह पर उच्च गुणवता की फिनिशिंग प्राप्त होती है।
5. लैंपिंग से तैयार सतह इतनी शुद्ध हो जाती है कि दोनों मैचिंग सतहों में वैक्यूम (Vaccum) पैदा हो जाता है।
1. बहुत ही शुद्ध साइज बनाने के लिए।
2.उच्च कोटि की फिनिशिंग प्राप्त करने के लिए।
3. पार्टी की सही फिटिंग प्राप्त करने के लिए।
4. सतहों को इतना समतल बनाने के लिए ताकि दोनों सतह आपस में जायें जैसे स्लिप गेज।
लैपिंग के लिए निम्नलिखित औजार व सामान की आवश्यकता होती
1.लैपटूल विभिन्न आकृति के
2. लैपिंग कम्पाऊण्ड
3. लैपिंग प्लेट
4. एबेसिव बैल्ट लैपिंग मशीन।
लैपिंग कम्पाऊंड, ऑयल, पैराफिन, ग्रीस
लैपिंग के उद्देश्य क्या-क्या है।
लैपिंग के उद्देश्य (Purposes of Lapping) -1. ज्योमितिय परिशुद्धता सुधार लाना।
2. लैपिंग द्वारा सरफेस फिनिश को संशोधित करना।
3. कम्पोनेंट की उच्च डिग्री की विमांकन शुद्धता प्राप्त करना।
4. मैचिंग कम्पोनेंट के बीच फिट की गुणवत्ता को सुधारना।
लैपिंग के लाभ लिखो।
लैपिंग के लाभ (Advantages of Lapping)
1. वर्कपीस के साइज उच्च परिशुद्धता में प्राप्त किए जाते है।
2. सतह पर उभरे छोटे-छोटे हाई स्पॉटस बहुत ही पास-पास आ जाते है।
3. लैपिंग से उच्च स्तर की फिटिंग प्राप्त की जाती है।
4. वर्कपीस की सतह पर उच्च गुणवता की फिनिशिंग प्राप्त होती है।
5. लैंपिंग से तैयार सतह इतनी शुद्ध हो जाती है कि दोनों मैचिंग सतहों में वैक्यूम (Vaccum) पैदा हो जाता है।
6. लैपिंग की हुई सतह पर जंग लगने की संभावना नहीं रहती है।
यदि किसी सुराख की लैपिंग करनी है तो सिलिण्डरीकल लैप का प्रयोग किया जाता है। इसमें लेप को ड्रिलिंग मशीन के स्पिण्डल में बांध कर और लैपिंग कम्पाऊण्ड लगाकर मशीन को चलाया जाता है और लैप को पार्ट के सुराख में ऊपर नीचे चलाया जाता है। जहां ज्यादा मात्रा में लैपिंग करनी हो, वहां पर विशेष लैपिंग मशीन का प्रयोग किया जाता है। एबेसिव कम्पाऊंड के अत्याधिक प्रयोग से वर्क तथा प्लेट के बीच एबेसिव का रोलिंग एक्शन होता है। जिसके कारण अशुद्धता का विकास हो जाता है। फ्लैट लेप की सरफेस चार्जिंग करने से पहले स्क्रैपिंग करके शुद्ध फिनिश कर लेना चाहिए। प्लेट को चार्जिंग के बाद मिट्टी के तेल का प्रयोग करना चाहिए ताकि सभी लूज कणों को धोया जा सके। फाइन लैपिंग करते समय सरफेस में मिट्टी के तेल की सहायता से नमी रखी जानी चाहिए।
ड्राई लैपिंग (Dry Lapping)-
इसमें पहले लैए को चार्ज किया जाता है। अत्यधिक तेल तथा एबेसिव को पहले धो लिया जाता है और लैप की सतह पर Ambended Abrasive ही शेष बचे होते है इसमें भी लैपिंग करते समय मिट्टी के तेल या पैट्रोल से नमी रखी जाती है। ड्राई विधि से फिनिश की गई सतह से अच्छी फिनिश होती है। कई बार ड्राई लैपिंग की फिनिशिंग को वरियता दी जाती है।'
लैप क्या है, ये किस धातु के बनाये जाते हैं तथा लैपिंग करने की विधियां लिखो ?
लैपिंग करने के लिए जिस टूल का प्रयोग किया जाता है, उसे लैप टूल कहते हैं। यह भिन्न-भिन्न आकृति के बनाये जाते हैं। लैप प्रायः नर्म धातुओं के बनाये जाते हैं, जैसे कास्ट आयरन, पीतल, तांबा, लैड (Lead), एल्यूमीनियम, टिन और कांसा इत्यादि के बनाये जाते हैं क्योंकि इनकी सतह पर एबेसिव कणों को चिपकाया जाता है। एबेसिव कणों को दबाव द्वारा चिपकाया जाता है, जिसे चार्जिंग कहते हैं। इसके लिए जो एबेसिव कण प्रयोग किए जाते हैं, उसे चार्जिंग मैटेरियल कहते हैं। जैसे हीरा (Dia mond), कोरण्डम, एमरी, एल्युमीनियम आक्साइड और सिलिकान कार्बाइड आदि। ज्यादा धातु काटने के लिए सिलिकन कार्बाइड एब्रेसिव और फिनिशिंग के लिए एल्यूमीनियम आक्साइड के एबेसिव प्रयोग किए जाते हैं।लैपिंग विधि (Lapping Method)
लैपिंग की क्रिया हाथ द्वारा या मशीन द्वारा की जाती है। सबसे पहले लैपिंग किए जाने वाले पार्ट की आकृति के अनुसार लैप का चुनाव करते हैं जैसे फ्लैट सर्फेस के लिए फ्लैट लैप (Flat Lap) अन्दरूनी सुराख या अर्द्धगोलाकार सतह के लिए सिलिण्डरीकल लैप, राऊण्ड शाफ्ट के लिए रिंग लैप, बड़े व्यास के सिलिण्डर या गेज़िज़ (Gauges) के लिए फ्लोटिंग लैप का चुनाव किया जाता है। इसके बाद लैप पर लैपिंग कम्पाऊण्ड लगा कर जॉब की लैप की -जाने वाली सतह पर तेल लगा कर फ्लैट लैप को आगे पीछे या दाएं-बाएं चलाना चाहिए। यह क्रिया तब तक की जाती है, जब तक इच्छित फिनिश प्राप्त न हो जाये। यदि किसी रॉड की लैपिंग करनी है तो उसे लेथ मशीन पर बांध कर रिंग लैप द्वारा लैपिंग की जाती है, इसमें भी रिंग लैप को आगे पीछे घुमाकर और चला कर लैपिंग की जाती है।प्वेट (Wet) तथा ड्राई (Dry) लैपिंग से आप क्या समझते है ?
वेट लैपिंग (Wet Lapping) - वेट लैपिंग (Wet Lapping) में तेल तथा लैप की सरफेस पर एबेसिव अधिक होते है जैसे लैप वर्कपीस पर चलता है तो एबेसिव के कण भी मूवमैंट करते हैं।ड्राई लैपिंग (Dry Lapping)-
इसमें पहले लैए को चार्ज किया जाता है। अत्यधिक तेल तथा एबेसिव को पहले धो लिया जाता है और लैप की सतह पर Ambended Abrasive ही शेष बचे होते है इसमें भी लैपिंग करते समय मिट्टी के तेल या पैट्रोल से नमी रखी जाती है। ड्राई विधि से फिनिश की गई सतह से अच्छी फिनिश होती है। कई बार ड्राई लैपिंग की फिनिशिंग को वरियता दी जाती है।'
जहां लैपिंग अलाऊंस अधिक हो वहां किस धातु के लैप प्रयोग किए जाते हैं व क्यों ?
उत्तर-जहां पर लैपिंग अलाऊंस अधिक हो वहां तांबे (Copper) और पीतल (Brass) के लैप प्रयोग किए जाते हैं क्योंकि कास्ट आयरन लैप की अपेक्षा यह जल्दी चार्ज होते हैं और कटाई अधिक करते हैं।
सैपिंग एबेसिव कौन-कौन प्रयोग किए जाते हैं ?
उत्तर-लैपिंग किया के लिए निम्नलिखित एवेसिन प्रयोग किए जाते हैं
1. एल्यूमीनियम आवसाइड (Alumininm Oxide)- यह सिलिकान कार्याइड की अपेक्षा अधिक चिमड़ा होता है। यह Fused और Unfused फार्म में मिलता है। Fused Aluminium Oxide का प्रयोग नर्म स्टील और नानफैरस मैटल की लेपिंग में किया जाता है जबकि Unfused Aluminium Oxide का प्रयोग अधिक मात्रा में धातु घिसाने के लिए व उच्च कोटि की फिनिश के लिए किया जाता है।
2. सिलिफान कार्याइड (Silicon Carbide) यह बहुत ही कठोर एसिय होता है। इसके ऐन बहुत तेज और भंगुर होते हैं। इसका प्रयोग हार्ड स्टील और कास्ट आयरन की लैपिंग के लिए करते हैं। इसके द्वारा भारी मात्रा में को हटाया जाता है।
3. बोरोन कार्बाइड (Boran Carbide) डायमण्ड के बाद हार्डनेस में इसी का ही कम आता है। इसकी कटिंग क्षमता बहुत अच्छी है लेकिन महंगा होने के कारण इसके द्वारा डाई व गेजों की लैपिंग की जाती है।
4. डायमण्ड (Diamond) यह सभी एबेसिव में सबसे कठोर होता है। इसका प्रयोग छोटे सुराख़ों की लेपिंग करने के लिए रोटरी लैपिंग में किया जाता है। इसका प्रयोग टंगस्टन कार्बाइड की लैपिंग में किया जाता है। इसके रोटरी डायमण्ड लैप भी तैयार किए जाते है।
1. एल्यूमीनियम आवसाइड (Alumininm Oxide)- यह सिलिकान कार्याइड की अपेक्षा अधिक चिमड़ा होता है। यह Fused और Unfused फार्म में मिलता है। Fused Aluminium Oxide का प्रयोग नर्म स्टील और नानफैरस मैटल की लेपिंग में किया जाता है जबकि Unfused Aluminium Oxide का प्रयोग अधिक मात्रा में धातु घिसाने के लिए व उच्च कोटि की फिनिश के लिए किया जाता है।
2. सिलिफान कार्याइड (Silicon Carbide) यह बहुत ही कठोर एसिय होता है। इसके ऐन बहुत तेज और भंगुर होते हैं। इसका प्रयोग हार्ड स्टील और कास्ट आयरन की लैपिंग के लिए करते हैं। इसके द्वारा भारी मात्रा में को हटाया जाता है।
3. बोरोन कार्बाइड (Boran Carbide) डायमण्ड के बाद हार्डनेस में इसी का ही कम आता है। इसकी कटिंग क्षमता बहुत अच्छी है लेकिन महंगा होने के कारण इसके द्वारा डाई व गेजों की लैपिंग की जाती है।
4. डायमण्ड (Diamond) यह सभी एबेसिव में सबसे कठोर होता है। इसका प्रयोग छोटे सुराख़ों की लेपिंग करने के लिए रोटरी लैपिंग में किया जाता है। इसका प्रयोग टंगस्टन कार्बाइड की लैपिंग में किया जाता है। इसके रोटरी डायमण्ड लैप भी तैयार किए जाते है।
. लेपिंग कम्पाऊण्ड क्या है ? इसमें प्रयुक्त व्हीक्लस कौन-कौन है?
उत्तर-लैपिंग करने के लिए जॉब की सतह पर जो पेस्ट (Paste) लगाया जाता है, उसे लैपिंग कम्पाऊण्ड कहते हैं। यह एबेसिक कणों का पाऊडर व (Vehicles) वाहक में मिलाया जाता है, जो लैपिंग की कटिंग किया को बनाए रखता है और सतह को लुबीकेट करता है।
(i)आमतौर पर निम्नलिखित वाहक (Vehicles) (10 वनस्पति तेल (Vegetable Oils)
(ii) मशीन तेल (Machine Oils)
प्रयोग किए जाते हैं
(iii) पेट्रोलियम जैली या ग्रीस (Petroleum Jelly or Grease) (iv) तेल व ग्रीस पर आधारित Vehicles फेरस धातुओं की लैपिंग के लिए प्रयोग किए जाते हैं।
(v) Water Soluble Cutting Oil.
तीबा व इसके अलाय (Alloy) की लैपिंग व नानफेरस धातुओं की लैपिंग के लिए Soluble Oil व Bentomite का प्रयोग किया जाता है। लेपिंग कम्पाऊण्ड में पानी मिट्टी के तेल का प्रयोग भी करते हैं। इससे लैपिंग कम्पाऊण्ड (Solvem) बनता है।
लेपिंग के लिए एड्रेसिव पेन साइज (Abrasive grain Size) 50 से 800 तक होता है। इनके साइज का चयन लैप की जाने वाली सतह के प्रकार और फिनिशिंग की शुद्धता पर निर्भर करता है।
लैपिंग के द्वारा ज्यादा से ज्यादा जितनी धातु घिसाई जाती है, उसे लैपिंग एलाऊस कहते हैं, जो 0.005mm से 0.01.mum तक रखा जाता है। रफ ग्रेड के लैप के लिए 0.02mmm तक व फाईन ग्रेड में 0.001mm से एडज 0.002mm तक रखा जाता है।
1. क्लोज ग्रेन्ड कास्ट आयरन (Close Grained Cast Iron)
2. तांबा (Copper)
3. पीतल (Brass)
4. सीसा (Load)
आमतौर सबसे अधिक कास्ट आयरन (Close Grained Cast Iron) के बनाए जाते है लेकिन जहां लैपिंग एलाऊंस अधिक होता है वहां पर तांबा तथा पीतल के लैप प्रयोग किए जाते हैं। यह कास्ट आयरन लैप की अपेक्षा अधिक कटिंग करते है। लैंड के बने लैप सुराखों की लैपिंग के लिए उपयुक्त होते है। लेड लैप सस्ते होते है। लैड लैप स्टील आर्बर पर इच्छानुसार माप के बनाए जाते हैं। जब यह लैप घिस जाते है तो इन्हें दोबारा चार्ज किया जाता है।
उत्तर- 1. अन्दरूनी लैपिंग टूल्ज (Internal Lapping Tools) - अन्दरूनी लैपिंग टूल्ज सालिड या एडजस्टेबल टाइप के होते हैं। बड़े साइज के लैप कास्ट आयरन के बने होते है जबकि छोटे साइज के अन्दरूनी लैप मुख्यतः तांबे व पीतल के बने होते हैं। यह एडजस्टेबल प्रकार के भी होते हैं, जिनकी स्लीव तांबे की बनी होती है तथा बदली जा सकती है। इसकी बाहरी सतह पर ग्रूव कटे होते हैं, जिससे एबेसिव कम्पाऊण्ड को ठहराया जाता है और Slit का उद्देश्य साइज को बढ़ाने के लिए किया जाता है। कुछ लैप बॉडी में सुराख बने होते हैं जो लैपिंग कम्पाऊण्ड के लिए होते हैं। लैप की लम्बाई होल की लम्बाई से अधिक होनी चाहिए।
Holes की लैपिंग करते समय लैप को हाथ द्वारा या स्पैशल लैपिंग मशीन द्वारा घुमाया जाता है। होल में लैप टाइट रहना चाहिए इसके लिए एडजस्टेबल लैप प्रयोग किए जाते है इनमें तांबे की बनी हुई इंटरचेंजेएविल स्लीव प्रयोग की जाती है। मशीन लैपिंग में Sensitive drill machine प्रयोग की जाती है।
लैपिंग करते समय लैप को होल से बाहर नहीं निकालना चाहिए तथा पूरी लम्बाई में प्रयोग करना चाहिए। लैपिंग करते समय लैप को क्लॉकवाइज घुमाते समय ही आगे की तरफ धकेलना चाहिए।
तीबा व इसके अलाय (Alloy) की लैपिंग व नानफेरस धातुओं की लैपिंग के लिए Soluble Oil व Bentomite का प्रयोग किया जाता है। लेपिंग कम्पाऊण्ड में पानी मिट्टी के तेल का प्रयोग भी करते हैं। इससे लैपिंग कम्पाऊण्ड (Solvem) बनता है।
लेपिंग के लिए एड्रेसिव पेन साइज (Abrasive grain Size) 50 से 800 तक होता है। इनके साइज का चयन लैप की जाने वाली सतह के प्रकार और फिनिशिंग की शुद्धता पर निर्भर करता है।
लैपिंग के लिए लुब्रीकेन्ट व लैपिंग.एलाऊंस लिखो।
लैपिंग के लिए एब्रेसिव के साथ लुब्रिकेन्ट का प्रयोग किया जाता है। इसमें सतह पर अच्छी फिनिशिंग आती है। लैपिंग लुब्रिकेन्ट मशीन आयल (Machine Oil), मिट्टी का तेल (Karosine Oil), ग्रीस (Grease) इत्यादि प्रयोग किए जाते हैं।लैपिंग के द्वारा ज्यादा से ज्यादा जितनी धातु घिसाई जाती है, उसे लैपिंग एलाऊस कहते हैं, जो 0.005mm से 0.01.mum तक रखा जाता है। रफ ग्रेड के लैप के लिए 0.02mmm तक व फाईन ग्रेड में 0.001mm से एडज 0.002mm तक रखा जाता है।
लैप किन-किन धातुओं के बनाए जाते हैं?
लैप मुख्यतः निम्नलिखित धातुओं के बनाए जाते हैं
1. क्लोज ग्रेन्ड कास्ट आयरन (Close Grained Cast Iron)
2. तांबा (Copper)
3. पीतल (Brass)
4. सीसा (Load)
आमतौर सबसे अधिक कास्ट आयरन (Close Grained Cast Iron) के बनाए जाते है लेकिन जहां लैपिंग एलाऊंस अधिक होता है वहां पर तांबा तथा पीतल के लैप प्रयोग किए जाते हैं। यह कास्ट आयरन लैप की अपेक्षा अधिक कटिंग करते है। लैंड के बने लैप सुराखों की लैपिंग के लिए उपयुक्त होते है। लेड लैप सस्ते होते है। लैड लैप स्टील आर्बर पर इच्छानुसार माप के बनाए जाते हैं। जब यह लैप घिस जाते है तो इन्हें दोबारा चार्ज किया जाता है।
अन्दरूनी व बाहरी लैपिंग के लिए प्रयोग किए जाने वाले लैप टूल्स का वर्णन करो व चित्र बनाओ।
उत्तर- 1. अन्दरूनी लैपिंग टूल्ज (Internal Lapping Tools) - अन्दरूनी लैपिंग टूल्ज सालिड या एडजस्टेबल टाइप के होते हैं। बड़े साइज के लैप कास्ट आयरन के बने होते है जबकि छोटे साइज के अन्दरूनी लैप मुख्यतः तांबे व पीतल के बने होते हैं। यह एडजस्टेबल प्रकार के भी होते हैं, जिनकी स्लीव तांबे की बनी होती है तथा बदली जा सकती है। इसकी बाहरी सतह पर ग्रूव कटे होते हैं, जिससे एबेसिव कम्पाऊण्ड को ठहराया जाता है और Slit का उद्देश्य साइज को बढ़ाने के लिए किया जाता है। कुछ लैप बॉडी में सुराख बने होते हैं जो लैपिंग कम्पाऊण्ड के लिए होते हैं। लैप की लम्बाई होल की लम्बाई से अधिक होनी चाहिए।
Holes की लैपिंग करते समय लैप को हाथ द्वारा या स्पैशल लैपिंग मशीन द्वारा घुमाया जाता है। होल में लैप टाइट रहना चाहिए इसके लिए एडजस्टेबल लैप प्रयोग किए जाते है इनमें तांबे की बनी हुई इंटरचेंजेएविल स्लीव प्रयोग की जाती है। मशीन लैपिंग में Sensitive drill machine प्रयोग की जाती है।
लैपिंग करते समय लैप को होल से बाहर नहीं निकालना चाहिए तथा पूरी लम्बाई में प्रयोग करना चाहिए। लैपिंग करते समय लैप को क्लॉकवाइज घुमाते समय ही आगे की तरफ धकेलना चाहिए।
2. बाहरी लैपिंग टूल्ज (External Lapping Tools) - इस प्रकार के लैप जॉब की बाहरी सतह की लैपिंग के लिए प्रयोग किए जाते हैं। ये निम्नलिखित प्रकार के होते है जैसे फ्लैट लैप, रिंग लैप और स्प्रिंग लोडिङ लैप (Spring Loaded Lap) एडजस्टेबल रिंग लैप की बॉडी में स्लाट कटा होता है, जिसके कारण इसके साइज को एडजस्ट किया जा सकता है। रिंग लैपिंग हाथ द्वारा भी की जाती है। इसमें जॉब को वाइस में Clamp करके लैपिंग करते हैं। जबकि रिंग लैपिंग लेथ मशीन पर जॉब को बांध कर भी की जाती है। इसके लिए लैप को आगे पीछे व गोलाई में चलाना चाहिए। बड़े व्यास की जॉब के लिए विशेष प्रकार के लैप प्रयोग किए जाते है, जिसकी बॉडी लकड़ी की होती है। एडजस्टेबल रिंग लैप में स्लाट कटे होते है यह लैपिंग कम्पाऊंड को फीड करते है तथा इनसे इसका साइज भी एडजस्ट किया जाता है। कुछ रिंग लैप इंटरचेजएदिल बुश वाले भी होते हैं।
बाहरी लैपिंग में External Thread Ring Lap भी प्रयोग किए जाते है , इसमें Interchangeable Thread Bush होते है। Ring laps प्रायः Close Grained Cast Iron के बनाए जाते है। Ring Lapping Vice पर हाथ द्वारा तथा लेथ मशीन पर की जाती है। लैपिंग करते समय लैप को वर्कपीस के साथ आगे तथा पीछे दिशा बदल-बदल कर घुमाते हुए स्लाइड करना चाहिए। बड़े व्यास की लैपिंग के लिए स्पैशल लैप तैयार करके प्रयोग किए जाते है।
फ्लैट लैप (Flat Lap)-
फ्लैट सतहों की लैपिंग के लिए फ्लैट लैप प्रयोग किए जाते है। यह आयताकार या वर्गाकार आकृति में बने होते है तथा Close grained cast iron के बने होते है।
सिलिण्ड्रीकल लैप की चार्जिंग किस प्रकार की जाती है ? उत्तर-सिलिण्ड्रीकल लैप का प्रयोग अन्दरूनी सतह की लैपिंग के लिए। करते है। इसकी चार्जिंग के लिए सबसे पहले हार्ड स्टील ब्लाक की सतह पर एब्रेसिव कम्पाऊण्ड की पतली परत लगाई जाती है। इसके बाद लैप को इसके ऊपर रोल (Roll) किया जाता है और दबाया जाता है, जिससे एब्रेसिव कम्पाऊण्ड लैप की बाहरी सतह पर चिपक जाता है या इसमें घुस जाता है। रिंग लैप की चार्जिंग हार्ड स्टील के रोलर द्वारा की जाती है। रोलर का व्यास लैप के अन्दरूनी व्यास से थोड़ा कम होता है।.
सिलिण्ड्रीकल लैप की चार्जिंग किस प्रकार की जाती है ? उत्तर-सिलिण्ड्रीकल लैप का प्रयोग अन्दरूनी सतह की लैपिंग के लिए। करते है। इसकी चार्जिंग के लिए सबसे पहले हार्ड स्टील ब्लाक की सतह पर एब्रेसिव कम्पाऊण्ड की पतली परत लगाई जाती है। इसके बाद लैप को इसके ऊपर रोल (Roll) किया जाता है और दबाया जाता है, जिससे एब्रेसिव कम्पाऊण्ड लैप की बाहरी सतह पर चिपक जाता है या इसमें घुस जाता है। रिंग लैप की चार्जिंग हार्ड स्टील के रोलर द्वारा की जाती है। रोलर का व्यास लैप के अन्दरूनी व्यास से थोड़ा कम होता है।.









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