Marking and marking tool (Chapter =4)

 

मार्किंग और मार्किंग टूल


मार्किंग या लेआउट

मार्किंग है या लेआउट एक टेक्निकल टर्म है। जिसका अर्थ है कारीगर की सुविधा के लिए धातु की सतह पर ड्राइंग के अनुसार सेंटर लाइन, केंद्र बिंदु ,चाप, सर्किल आदि खींचना इसी को मार्किंग या लेआउट कहते हैं।


मार्किंग के लिए निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए।

मार्किंग शुरू करने से पहले ड्राइंग या ब्लूप्रिंट को अच्छी तरह से पढ़ लेना चाहिए।
ड्राइंग में दिए गए माफ की सुविधा के अनुसार उचित मार्किंग टूल का चुनाव करना चाहिए।


मार्किंग मीडिया


जॉब या पार्ट की सतह पर लगाई जाने वाली रेखाऔ आदि को स्पष्ट व साप देखने के लिए उसकी सतह पर जो पदार्थ लगाते हैं, उसे मार्किंग मीडिया कहते हैं।

मार्किंग मीडिया चार प्रकार के होते हैं।

1. चाक
2. लेआउट डाई
3. कॉपर सल्फेट का घोल
4. सैल्युलोज लैक्युअर

मार्किंग करने की विधियां


सेंट्रल लाइन विधि
इसमें टेढ़े मेढ़े आकृति वाले जॉब जिनकी कोई साइड या भुजा सही न बनी हो उनकी मार्किंग की जाती है, इसके लिए पार्ट या जॉब की लंबाई व चौड़ाई के मध्य में दो सेंट्रल लाइन खींचकर उसके ऊपर व नीचे देख रेखाएं लगाकर मार्किंग की जाती है, सेंट्रल लाइन को आधार माना जाता है।

डॉटम लाइन विधि
इस विधि में पहले जॉब को दो संगलन भुजाओं को 90 डिग्री के कोण पर तैयार कर लिया जाता है। तथा एक सताह को भी शुद्ध समतल बनाया जाता है। इन्हीं भुजाओं को आधार बनाकर पूरी मार्किंग की जाती है।

टेंम्पलेट विधि
इस विधि में जॉब की आकृति के समान टेंपलेट होती है। जिसमें जॉब की सतह पर रखकर स्क्राइबर से मार्किंग की जाती है ।इसकी मार्किंग ज्यादा शुद्ध साइज में नहीं होती है।

 

मार्किंग प्रयोग होने वाले विभिन्न औजार:-

1. सर्फेस प्लेट
2. मार्किंग टेबल
3. एंगल प्लेट
4. 'वी' ब्लॉक
5. स्क्राइबर
6. आउटलेग कैलीपर
7. सर्फेस गेज
8. वर्नियर हाइट गेज
9. डिवाइडर
10. टैॢमल
11. स्क्रैच गेज
12. कम्बीनेशन सेट
13. स्टील रुल
14. डॉट पंच
15. सेंटर पंच
16. मार्किंग हैमर


सरफेस प्लेट

यह आयताकार, वर्गाकार और गोलाकार आकृति में बनी होती है, या क्लोज ग्रेनेड का स्टाइल ग्लास वर्क ग्रेनाइट की बनाई जाती है।

साइज

इसका साइज 100 × 100 एमएम से 200×१००० तक होता है।

बनावट

इसको बनाने के लिए कास्ट आयरन को ढाल कर उसके बाद राफ मशीनिंग द्वारा शक्ल तैयार की जाती है। इसे प्राकृतिक सीजनिंग के लिए बाहर 7 से 8 महीने छोड़ दिया जाता है। ताकि इस पर मौसम का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। फिर से मशीनिंग द्वारा साइज और स्क्रेपिंग द्वारा इसे शुद्ध समतल बनाया जाता है।

सरफेस गेज

इसके द्वारा जॉब के ऊपर १ /64 इंच और १/ 2 एमएम की शुद्धता में मार्किंग की जाती है ।
'वी' ब्लॉक की सहायता से गोल रोड का सेंटर निकाला जाता है ।
लेट मशीन पर जॉब को चक के अंदर फिट करते समय उसमें जॉब को जांचा जाता है ।कि वह सेंटर में बंधी है कि नहीं ।
इसके द्वारा जॉब की दो विपरीत साइडे आपस में समांतर है, या नहीं यह भी चेक किया जाता है


लाइन स्क्राइब करते समय स्क्राइबर को कोण क्या रखना चाहिए ।
३० से ३५


ऐग्ल प्लेट क्या है ,और यह कितने प्रकार की होती है।


ऐग्ल प्लेट एक मार्किंग टूल है। इसका प्रयोग मार्किंग करते समय जॉब को सहारा देने के लिए किया जाता है या 90 डिग्री के कोण पर शुद्ध साइज में बनी होती है।
यह भी क्लोज ग्रे ग्रेनाइट कास्ट आयरन की बनाई जाती
है ।
यह तीन प्रकार की होती है।
1. सॉलि़ड एंगल प्लेट
2. बॉक्स टाइप प्लेट
3. एडजेस्टेबल एंगल प्लेट


स्क्राइबर किसे कहते हैं। ये कितने प्रकार के होते हैं।

यह एक मार्किंग टूल है। इसका उपयोग मकिग करते समय लाइन लगाने के लिए किया जाता है। यह टूल स्टील की एक तार का बना होता है। इसकी लंबाई आमतौर पर १५० एमएम से 200 एमएम तक मिलती है। इसका एक सिर नुकील, तेज और दूसरा 90 डिग्री के कोण 90 डिग्री के कोण पर मुड़ा होता है। इसके प्वाइंट या सिर 12 से 15 डिग्री कोण ग्राइण्ड होता है।
स्क्राइबर पांच प्रकार के होते हैं।
1. साधारण स्क्राइबर
2. बर नोएडा स्क्राइबर
3. एडजेस्टेबल स्काई बर
4. पॉकेट स्काई बर
5. नोट स्क्राइबर


'वी' ब्लॉक क्या है यह कितने प्रकार के हैं।


वी ब्लॉक एक मार्किंग टुल है। इसका प्रयोग माकिग करते समय छोटी-छोटी जॉब को सहारा देने के लिए किया जाता है। तथा इसके ऊपर गोल रोड को कैलेम्प करके सर्फेस गेज और वर्नियर हाइट गेज की द्वारा से उसका केंद्र बिंदु निकाला जाता है। यह‌‌ भी क्लोज ग्रेनड कास्ट आयरन का बना होता है ।उसकी बॉडी पर 90 डिग्री कोण पर ग्रुव बने होते हैं।
ये चार प्रकार के होते हैं।
1. सैंपल 'वी 'ब्लॉक
2. इम्प्रूण्ड 'वी' ब्लॉक
3. 'वी' ब्लॉक कलैम्प के साथ
4. मैग्नेटिक 'वी' ब्लॉक


पंच क्या है ।किस धातु के बने होते हैं, और कितने प्रकार के होते हैं।


पंच
जॉब धातु की सतह पर मार्किंग करने के बाद खींची गई रेखा ओवर बिंदुओं को पक्का करने के लिए पंच का प्रयोग किया जाता है। जिससे रेखाओं को पक्का कर के बाद में‌ उसे काटा जा सके ।
मटेरियल
यह हाई कार्बन स्टील के बनाए जाते हैं ।तथा तथा हाड टेंम्पल किया जाता हैं । इसकी लंबाई 100 एमएम तक होती है।

पंच नौ प्रकार करते हैं ।
1. डॉट पंच
2. सेंटर पंच
3. प्रिकं पंच
4. ऑटोमेटिक पंच
5. बैल पंच
6. सॉलिड पंच

7. हालो पंच
8. पिन पंच
9. डबल एंण्ड पंच


जैनी कैलीपर किसे कहते हैं।
जैनी कैलीपर एक मार्किंग टूल है। इससे हर्मोफोडाइट कैलिपर तथा आठ लैग कैलिपर भी कहते हैं। इसके द्वारा जॉब की सतह पर समांतर रेखाएं खींची जाती है। तथा किसी भी गोल छड का सेंटर इसके द्वारा ज्ञात किया जाता है ।
मटेरियल
यह माइल्ड स्टील का बना होता है ।

जैनी कैलीपर दो प्रकार के होते हैं।

1. सालिड टाइप जैनी कैलीपर
2.
एडजेस्टेबल प्वाइंट जैनी कैलीपर

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