Heat Treatment ( Chapter = 9 first)

ऊष्मा उपचार

ऊष्मा उपचार से आप क्या समझते हैं इसके प्रयोग लिखो?
ऊष्मा उपचार एक ऐसी विधि है जिसके द्वारा धातु को गर्म और ठंडा करके उसके अंदरूनी बनावट को बदलकर उसके यांत्रिक गुणों को आवश्यकतानुसार बदलना जा सकता है । ऊष्मा उपचार कहते हैं।


इसका प्रयोग निम्न कार्यों के लिए किया जाता है।

1. कठोर धातु को नरम करने के लिए ताकि उस पर मशीनिंग की जा सके।
2. धातु में कठोरता बढ़ाने के लिए।
3. कटिंग टूल में कठोरता लाने के लिए ताकि वह दूसरे धातु काट सकें।
4. धातु पर जंग लगने से बचाने के लिए।


स्टील का ऊष्मा उपचार क्यों आवश्यक है

स्टील में आवश्यकतानुसार तान्त्रिक गुण लाने के लिए उसमें ऊष्मा उपचार किया जाता है। इसके लिए स्टील को गर्म करके उसके बाद उसे निश्चित दर से ठंडा किया जाता है। जिससे विभिन्न प्रकार के स्ट्रक्चर प्राप्त होते हैं। जो स्टील के गुणों में भी परिवर्तन कर देते हैं इसकी आवश्यकता अनुसार गुण लाने व बनावट को सही सेट करने के लिए ऊष्मा उपचार किया जाता है।

स्टील के प्रमुख स्ट्रक्चर :-

1. फेराइट
2. सीमेन्टाइट
3. पियरलाइट
4. ऑस्टेनाइट
5. मार्टेनसाइट
6. टोस्टाइट
7. सारबाईट

ऊष्मा उपचार की विधियों का वर्णन करो

ऊष्मा उपचार की निम्नलिखित विधियां प्रयोग की जाती है

नारलाइजिरग

स्टील को ठंडा गर्म हालत में हैमरिंग, रोलिंग, फार्जिंग व बेंन्डिंग करने से धातु के अंदरूनी बनावट बदल जाती है।
इसलिए इन कियाऔ के बाद दोबारा सामान्य दशा में लाने की क्रिया को नारलाइजिरग कहते हैं।

उद्देश्य

1. धातु में फाइन ग्रेन साइज उत्पन्नं करने के लिए
2. धातु को गर्म या ठंडी अवस्था में कूदने, पटने पर व uneven cotting करने पर उसके अन्दरूनी स्ट्रक्चर में जो खिंचाव आये है। उन्हें दूर करने के लिए।
3. यांत्रिक गुणों को सुधारने या बढ़ाने के लिए।


एनीलिंग

स्टील के कठोर पार्टो को मशीनिंग योग्य बनाने के लिए उसे नर्म करने की विधि को एनीलिंग कहते हैं

उद्देश्य

1. नर्म करने के लिए ।
2. मशीनएबिलिटी का गुण बनाने के लिए।
3. डक्टिलिटी का गुण बनाने के लिए।
4. आंन्तरिक खिंचाव़ो को दूर करने के लिए।

हार्डेनिंग

किसी नर्म स्टील पार्ट र टूल को घिसने से बचाने या कटाई युग्या बनाने के लिए ऊष्मा उपचार द्वारा उसे हार्ड य कठोर किया जाता है। जिसे हार्डेनिंग कहते हैं ।स्टील पार्ट की कठोरता कार्बन की प्रतिशत मात्रा के ऊपर निर्भर करती है। जिसमें कार्बन की मात्रा अधिक होगी, वह ज्यादा कठोर होगा और जिस में कार्बन की मात्रा कम होगी वह थोड़ा कम कठोर होगा।

टेंम्परिंग

जब स्टील पार्ट य टल्स को हार्ड किया जाता है। तो भंगूरता का गुण जाता है। जिसके कारण यदि उन पर चोट लग जाए तो वहां पार्ट य टूल टूट जाता है अतः पार्ट की हडिनैस भी बनी रहे और भगुरता भी कम हो जाए। इसके लिए पार्ट को टेंपरिंग किया की जाती है।
उद्देश्य

1. अंदरूनी स्टेॢस और स्ट्रेन से स्टील को मुक्त करने के लिए।
2. भंगुरता को कम करने के लिए।
3. कुछ डक्टिलिटी बनाए रखने के लिए।

टिप्पणियाँ

लोकप्रिय पोस्ट